: सुपोषण भारत अभियान के तहत आंगनवाड़ी केन्द्रों पर कार्यक्रम आयोजित
Sat, Sep 21, 2024
सुपोषण भारत अभियान के तहत आंगनवाड़ी केन्द्रों पर कार्यक्रम आयोजित
रिपोर्ट धार जिला ब्यूरो चीफ भगवान मुजाल्दाजिला अधिकारी सुभाष जैन के निर्देशानुसार महिला एवं बाल विकास विभाग कुक्षी परियोजना अधिकारी मंजूला बघेल के मार्गदर्शन में नगर की आंगनबाड़ी केन्द्रों में 01 से 30 सितम्बर 2024 तक पोषण माह आयोजन किया जा रहा है।
जनसमुदाय तक स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वच्छता संबंधित व्यापक प्रचार एवं प्रभावी व्यवहार परिवर्तन हेतु जनआंदोलन के रुप में प्रति वर्ष राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी सुपोषण भारत अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। जहां आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा महिलाओं को पोषण आहार के संबंध में बताया वही पोषण व्यंजन की प्रदर्शनी का लगाई गई।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मीनाक्षी परसाई, हंसा पाटीदार, पुष्पा कास्त्रा, दीपिका ब्रजवासी, किरण साधु, अनिता चोयल, श्वेता परिहार, मंजू चौहान, रंजना राठौर एवं पार्षद सहित अन्य की सहभागिता से कार्यक्रम हो रहे है।
: थांदला में स्वच्छता ही सेवा अभियान 2024 के तहत किया गया श्रमदान
Wed, Sep 18, 2024
थांदला में स्वच्छता ही सेवा अभियान 2024 के तहत किया गया श्रमदान
झाबुआ 17 सितम्बर, 2024। कलेक्टर नेहा मीना के निर्देशानुसार एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत झाबुआ के मार्गदर्शन में 17 सितंबर 2024 को स्वच्छता ही सेवा अभियान के शुभारम्भ किया गया।इसके तहत नगरीय क्षेत्र थांदला के वार्ड क्र 9 मे बस स्टेण्ड क्षेत्र मे शनि मंदिर के समीप सफाई की गई। जिसमे नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी सुनिल पणदा, वार्ड पार्षद श्री राजू धानक, पार्षद श्री समर्थ (गोलू) उपाध्याय, अनुविभागीय अधिकारी श्री तरुण जैन, तहसीलदार श्री अनिल बघेल, मुख्य कार्य पालन अधिकारी, मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्री पप्पू बरिया एवं समस्त शासकीय विभागों के कर्मचारियों द्वारा श्रम दान कर सफाई की गई एवं स्वच्छता की शपथ ली गई।
: मध्यप्रदेश में कुपोषण के खिलाफ बड़ी कामयाबी
Wed, Sep 18, 2024
मध्यप्रदेश में कुपोषण के खिलाफ बड़ी कामयाबी
झाबुआ 17 सितम्बर, 2024। मध्य प्रदेश शासन की महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने जानकारी देते हुए कहा है कि मध्यप्रदेश में कुपोषण की स्थिति पर नज़र रखने के लिए भारत सरकार द्वारा संचालित पोषण ट्रैकर ऐप के आंकड़ो से मध्यप्रदेश के कुपोषण में एक सकारात्मक तस्वीर देखने को मिली हैं। उन्होंने कहा कि इस ऐप के जरिए पिछले एक वर्ष में बच्चों की कुपोषण स्थिति में निरंतर सुधार परिलक्षित हो रहा है।
2023 से 2024 के बीच के प्रमुख आंकड़े:
ट्रेकर ऐप के आंकड़ो के मुताबिक अप्रैल 2023 में राज्य में 30% बच्चे कम वजन वाले थे, जो जुलाई 2024 तक घटकर 27% रह गए हैं।ठिगनापन (Stunting)अप्रैल 2023 में दुबलापन 8% था, जो जुलाई 2024 में घटकर 7% हो गया है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राज्य में बच्चों के पोषण स्तर में पिछले एक वर्ष में ही उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
एन एफ एच एस-3 (NFHS-3) के आंकड़ों में भी दर्ज की गई गिरावट
मध्यप्रदेश में कुपोषण के खिलाफ जंग में पिछले 20 वर्षों में लगातार सफलता मिल रही है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-3 (NFHS-3) वर्ष 2005-06 और राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) वर्ष 2019-21 के जारी आंकड़ों के तुलनात्मक विश्लेषण से यह स्पष्ट है कि राज्य में बच्चों में कुपोषण के मामलों में गिरावट आई है। मध्यप्रदेश में 2005-06 में जहां 60% बच्चे उम्र के अनुसार कम वजन वाले थे वहीं वर्ष 2020-21 में यह आंकड़ा घटकर 33% हो गया। इस अवधि में 45% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे मध्यप्रदेश देशभर में तीसरे स्थान पर है। वर्ष 2005-06 में दुबलेपन की दर 35% थी, जो 2020-21 में घटकर 18.9% हो गई। इसमें भी 16.1 अंक यानी 45.9% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे राज्य देश में दूसरे स्थान पर है। गंभीर दुबलेपन के मामलों में 12.6% से घटकर 6.5% यानी 6.1 अंक (48.7%) की गिरावट आई, जिससे मध्यप्रदेश इस श्रेणी में भी देश में दूसरे स्थान पर है।इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पिछले 20 वर्षों में राज्य में कुपोषण की समस्या न केवल रुकी है, बल्कि इसमें लगातार गिरावट भी दर्ज की गई है। खासकर कम वजन और दुबलेपन जैसे खतरनाक श्रेणियों में मध्यप्रदेश का प्रदर्शन देश में दूसरे स्थान पर है। मध्यप्रदेश सरकार के प्रयास मध्यप्रदेश में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कई योजनाएं लागू की हैं।इनमें प्रमुख हैं: आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका राज्य में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को कुपोषित बच्चों की पहचान और उनके परिवारों को पोषण संबंधी सलाह देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन कार्यकर्ताओं के प्रयासों से कुपोषण में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। अटल बिहारी वाजपेयी बाल आरोग्य एवं पोषण मिशन के तहत राज्य सरकार ने अपने वित्तीय संसाधनों से कुपोषण निवारण के लिए योजनाएं बनाई हैं। इस योजना में हर जिले की आवश्यकता के अनुसार कार्य योजना बनाकर कुपोषण निवारण के विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। समुदाय की सहभागिता, समुदाय आधारित जागरूकता कार्यक्रमों के तहत गभर्वती महिलाओं, धात्री माताओं, और 6 माह से 24 माह के बच्चों को लक्षित किया गया है। आंगनवाड़ी केंद्रों में नियमित रूप से मंगल दिवस मनाया जाता है, जिसमें पोषण से संबंधित जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाता है।मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्धन कार्यक्रम में एम्स के सहयोग से गंभीर कुपोषित बच्चों का प्रबंधन किया जाता है। इसमें 5 दिन की चिकित्सा और 6 माह का फॉलोअप किया जाता है, जिससे बच्चों का स्वास्थ्य सुधार हो सके। सहयोगिनी मातृ सक्षम समिति राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 में मध्यप्रदेश में सहयोगिनी मातृ सक्षम समिति का गठन किया गया है, जो सामुदायिक निगरानी प्रणाली को मजबूत बनाने का कार्य कर रही है। ऑनलाइन मॉनिटरिंग आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन को सुचारु और समय पर सुनिश्चित करने के लिए एक ऑनलाइन मॉनिटरिंग मॉड्यूल विकसित किया गया है।भविष्य की योजनाएं और लक्ष्य मध्यप्रदेश सरकार ने कुपोषण उन्मूलन के लिए विजन 2047 के तहत कुछ प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए हैं:मध्यप्रदेश सरकार ने 2025 तक 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में ठिगनापन 33% से कम, वजन 25% से कम, दुबलापन 8% से कम, और गंभीर दुबलापन 5% से कम करने का लक्ष्य तय किया है। वर्ष 2047 तक सभी प्रकार के कुपोषण का पूरी तरह से उन्मूलन करने का दीर्घकालिक लक्ष्य तय किया गया।